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श्री गणेश द्वादशनामावली

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श्री गणेश द्वादशनामावली गणेशजी के अनेक नाम हैं लेकिन ये 12 नाम प्रमुख हैं। निम्नलिखित श्री गणेश के द्वादश नाम नारद पुरान में पहली बार गणेश द्वादश नामावलि मे लिखित है | विद्यारम्भ तथा विवाह के पूजन के प्रथम मे इन नामो से गणपति की आराधना का विधान है | नारद पुराण में लिखित श्री गणेश द्वादशनामावली - प्रणम्य शिरसा देवं गौरीपुत्रं विनायकम् । भक्तावासं स्मरेन्नित्यं आयुःकामार्थसिद्धये ॥ १॥ प्रथमं वक्रतुण्डं च एकदन्तं द्वितीयकम् । तृतीयं कृष्णपिङ्गाक्षं गजवक्त्रं चतुर्थकम् ॥ २॥ लम्बोदरं पञ्चमं च षष्ठं विकटमेव च । सप्तमं विघ्नराजेन्द्रं धूम्रवर्णं तथाष्टमम् ॥ ३॥ नवमं भालचन्द्रं च दशमं तु विनायकम् । एकादशं गणपतिं द्वादशं तु गजाननम् ॥ ४॥ द्वादशैतानि नामानि त्रिसंध्यं यः पठेन्नरः । न च विघ्नभयं तस्य सर्वसिद्धिकरः प्रभुः ॥ ५॥ विद्यार्थी लभते विद्यां धनार्थी लभते धनम् । पुत्रार्थी लभते पुत्रान्मोक्षार्थी लभते गतिम् ॥ ६॥ जपेद्गणपतिस्तोत्रं षड्भिर्मासैः फलं लभेत् । संवत्सरेण सिद्धिं च लभते नात्र संशयः ॥ ७॥ अष्टेभ्यो ब्राह्मणेभ्यश्च लिखित्वा यः समर्पयेत् । तस्य विद्या भवेत्सर्वा गणेशस्य प्र...

श्री गणेश अष्टावतार

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श्री गणेश अष्टावतार भगवान गणेश के आठ अवतारों का उल्लेख मुदगल पुराण में मिलता है, एक उपपुराण जो भगवान गणेश को विशेष रूप से समर्पित है। भगवान प्रत्येक रूप में मनुष्यों की 8 कमजोरियों को हराते हैं। ये उद्दंडता, अहंकार, इच्छा, क्रोध, लालच, भ्रम, अविश्वास और ईर्ष्या हैं। १. वक्रतुंड: वक्रतुण्डावताराश्च देहानां ब्रह्मधारकः | मत्सरासुरहन्ता स सिंहवाहनगः स्मृतः || भगवान् श्री गणेश का वक्रतुण्ड अवतार ब्रह्म स्वरुप से सम्पूर्ण शरीरों को धारण करने वाला है, मत्सर असुर का वध करने वाला तथा सिंह वाहन पर चलने वाला है।          भगवान् श्री गणेश का पहला अवतार वक्रतुण्ड का है । इसकी कथा इस प्रकार है की एक बार देवराज इन्द्र के प्रमाद से मत्सरासुर का जन्म हुआ। उसने दैत्यों के गुरु शुक्राचार्य से भगवान् शिव के पंचाक्षरी मंत्र (ॐ नमः शिवाय) की दीक्षा प्राप्त करके भगवान शिव की कठोर तपस्या की । भगवान् शिव ने उसकी तपस्या से प्रसन्न होकर उसे अभय होने का वरदान दिया । वरदान प्राप्त करके जब मत्सरासुर घर लौटा तो दैत्य गुरु शुक्राचार्य ने उसे दैत्यराज नियुक्त कर दिया ।   ...

गणेश नामावली

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गजानन महाराज के 108 नामों को गणेश नामावली कहते हैं।  1. बालगणपति : सबसे प्रिय बालक 2. भालचन्द्र : जिसके मस्तक पर चंद्रमा हो 3. बुद्धिनाथ : बुद्धि के भगवान 4. धूम्रवर्ण : धुंए को उड़ाने वाले  5. एकाक्षर : एकल अक्षर 6. एकदन्त: एक दांत वाले 7. गजकर्ण : हाथी की तरह आंखों वाले 8. गजानन: हाथी के मुख वाले भगवान 9. गजवक्र : हाथी की सूंड वाले  10. गजवक्त्र:  हाथी की तरह मुंह है 11. गणाध्यक्ष : सभी जनों के मालिक 12. गणपति : सभी गणों के मालिक 13. गौरीसुत : माता गौरी के बेटे  14. लम्बकर्ण : बड़े कान वाले देव 15. लम्बोदर : बड़े पेट वाले  16. महाबल : अत्यधिक बलशाली   17. महागणपति : देवादिदेव 18. महेश्वर: सारे ब्रह्मांड के भगवान 19. मंगलमूर्ति : सभी शुभ कार्यों के देव 20. मूषकवाहन : जिनका सारथी मूषक है 21. निदीश्वरम : धन और निधि के दाता 22. प्रथमेश्वर : सब के बीच प्रथम आने वाले  23. शूपकर्ण : बड़े कान वाले देव 24. शुभम : सभी शुभ कार्यों के प्रभु 25. सिद्धिदाता:  इच्छाओं और अवसरों के स्वामी 26. सिद्दिविनायक : सफलता के स्वामी 27. सुरेश्वरम : देवो...