पृथ्वी पर तीन ही रत्न हैं ...!!!!

कुबेर का घर वह साधु विचित्र स्वभाव का था। वह बोलता कम था। उसके बोलने का ढंग भी अजब था। माँग सुनकर सब लोग हँसते थे। कोई चिढ़ जाता था, तो कोई उसकी माँग सुनी-अनुसनी कर अपने काम में जुट जाता था। साधु प्रत्येक घर के सामने खड़ा होकर पुकारता था। 'माई ! अंजुलि भर मोती देना.. ईश्वर तुम्हारा कल्याण करेगा.. भला करेगा।' साधु की यह विचित्र माँग सुनकर स्त्रियाँ चकित हो उठती थीं। वे कहती थीं - 'बाबा ! यहाँ तो पेट के लाले पड़े हैं। तुम्हें इतने ढेर सारे मोती कहाँ से दे सकेंगे। किसी राजमहल में जाकर मोती माँगना। जाओ बाबा, जाओ... आगे बढ़ो...।' साधु को खाली हाथ गाँव छोड़ता देख एक बुढ़िया को उस पर दया आई। बुढ़िया ने साधु को पास बुलाया। उसकी हथेली पर एक नन्हा सा मोती रखकर वह बोली - साधु महाराज ! मेरे पास अंजुलि भर मोती तो नहीं हैं। नाक की नथनी टूटी तो यह एक मोती मिला है। मैंने इसे संभालकर रखा था। यह मोती ले लो। अपने पास एक मोती है, ऐसा मेरे मन को गर्व तो नहीं होगा। इसलिए तुम्हें सौंप रही हूँ। कृपा कर इसे स्वीकार करना। हमारे गाँव से खाली हाथ मत जाना।' बुढ़िया के हाथ का नन्हा सा मोती द...